जा दिन जनम भयो केजरी को, दिल्ली धँसी अढाई हाथ ।
झाँकन लगे सब दोगले बगलें, बगुला-भगत खुजावत माथ ।।
करन ब्यबस्था परिबर्तन को, दियौ वोट जनता ने ढेर ।
कहन लगे हमरी पावर में, अब भी कुछ बाकी है फेर ।।
जनलोकपाल तो यों ना मिलता, क्योंकि नियम रजा ना देय ।
लाइन बिछी नहिं सप्लाई की, हम ना दे सकते जल पेय ।।
बिजली "सस्ती" दे देंगे पर, गोवा सम सस्ती नहिं भाय ।
लॉ ऑर्डर की बात न करना, हम तो खुद धरने पे आय ।।
जनदरबार लगावत हम हैं, दूजे की हिम्मत कहाँ बोल ?
भीड़ बढ़े भग जावत हम हैं, फिर ना आवैं खुलती पोल ।।
बँगला गाड़ी "कभी ना लैंगे", "लै लेंगे", "ना लैंगे" ठीक ।
छोटा लैंगे, बड़ा कभी फिर, कुछ दिन तो जाएँ यों बीत ।।
टाइम दीजिए टाइम दीजिए, नए लोग हैं होगी भूल ।
आम आदमी कैसा दिखता, सीखत जा ऍक्टिंग-स्कूल ।।
मेरा धरना, मेरी खाँसी, मेरा मफलर, नया है path ।
जा दिन जनम भयो केजरी को, दिल्ली धँसी अढाई हाथ ।।
जै झाड़ू................... ! जै पोंचा ................. !
झाँकन लगे सब दोगले बगलें, बगुला-भगत खुजावत माथ ।।
करन ब्यबस्था परिबर्तन को, दियौ वोट जनता ने ढेर ।
कहन लगे हमरी पावर में, अब भी कुछ बाकी है फेर ।।
जनलोकपाल तो यों ना मिलता, क्योंकि नियम रजा ना देय ।
लाइन बिछी नहिं सप्लाई की, हम ना दे सकते जल पेय ।।
बिजली "सस्ती" दे देंगे पर, गोवा सम सस्ती नहिं भाय ।
लॉ ऑर्डर की बात न करना, हम तो खुद धरने पे आय ।।
जनदरबार लगावत हम हैं, दूजे की हिम्मत कहाँ बोल ?
भीड़ बढ़े भग जावत हम हैं, फिर ना आवैं खुलती पोल ।।
बँगला गाड़ी "कभी ना लैंगे", "लै लेंगे", "ना लैंगे" ठीक ।
छोटा लैंगे, बड़ा कभी फिर, कुछ दिन तो जाएँ यों बीत ।।
टाइम दीजिए टाइम दीजिए, नए लोग हैं होगी भूल ।
आम आदमी कैसा दिखता, सीखत जा ऍक्टिंग-स्कूल ।।
मेरा धरना, मेरी खाँसी, मेरा मफलर, नया है path ।
जा दिन जनम भयो केजरी को, दिल्ली धँसी अढाई हाथ ।।
जै झाड़ू................... ! जै पोंचा ................. !
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